लेखनी प्रतियोगिता -26-Apr-2022 प्यार और धोका
"तुम मुझे कहाँ लेकर आये हो। मुझे यहाँ बहुत डर लग रहा है । मेरा यहाँ दम घुट रहा है।नहीं मै यहाँ कैसे रह सकूँगी।". इतना कहकर सुनयना अमर का हाथ छुडा़कर भागने की कोशिश करने लगी।
लेकिन अमर ने उसके हाथ को इतना कसकर पकड़ रखा था कि उसके लाख कोशिश करने के बाद भी वह हाथ छुडा़ने में कामयाब नही हो सकी।
अमर सुनयना को बडी़ कठिनाई से एक बिल्डिग की पहली मंजिल पर ले गया।
अब सुनयना की समझ में आरहा था कि अमर ने उसके साथ धोका किया है अब वह यहाँ कैसे भी सुरक्षित नही है। सुनयना का दिमाग बिल्कुल काम नही कर रहा था।
अब वह अपने तकदीर को दोष देरही थी और मन ही मन सोच रही थी कि वह अमर के बहकावे में आकर अपने मम्मी पापा को धोका देकर क्यौ आयी।
अमर व सुनयना साथ साथ पढ़ते थे अमर सुनयना के घर आता जाता था क्योकि वह उसका पडौ़सी जो ठहरा।
अमर सुनयना की मम्मी को चाची कहता था। अमर रात को भी बहुत देर तक उनके घर बैठा रहता था।
अमर व सुनयना दौनौ जवान थे। और जब तेल और आग पास पास रहेगे तब क्या होगा आग तो भड़कनी ही थी। उन दौनौ को कितने ही अवसर अकेले मिलने के मिलते थे। जिससे दौनौ की नजदीकियां बढती ही गयी। और अब दौनौ इतने नजदीक आगये कि आपस में सम्बन्ध भी बनाने लगे।
एक दिन सुनयना की मम्मी ने उन दौनौ को रंगे हाथौ पकड़ लिया और इसके बाद अमर का घर आने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
परन्तु वह मौका मिलते ही एक होजाते थे। अब सुनयना एक दिन अमर से बोली," जानू अब मै तुम्हारे बिना नही रह सकती हू चलो यहाँ से कही भाग चलते है। "
अमर को इसी मौके की तलाश थी। उसने अपने एक दोस्त के साथ प्लान बनाया उसका दोस्त दिल्ली में रहता था। उन दौनौ ने सुनयना को कोठे वाली को बेचने का प्लान बनाडाला।
उसके दोस्त ने उसे बस स्टैन्ड के पास मिलने की कहकर दिन व तारीख तय करली थी। अमर वहाँ से दो दिन पहले अपनी बुआ के पास चलागया। और उह रात को बापिस आगया। जिससे किसीको शक नही होगी।
सुनयना को उसने नींद की गोलिया लाकर दे दी थी। और उनको दूध अथवा खाने मे घर वालौ को खिलाने के लिए कह दिया। सुनयना पर तो भागने का भूत सवार था वह बुरा भला सब भूल चुकी थी। उसे केवल अमर का अन्धा प्यार नजर आरहा था। उसके पीछे छिपा धोका व फरेब नजर नहीं आर रहाथा।
सुनयना ने अमर के प्लान से अपने घरवालौ के खाने में नींद की गोलिया मिलादी जिससे वह सब गहरी नीद में सोगये। इसके बाद सुनयना को घर में नकदी व गहने जो भी मिले उनको लेकर अमर के पास पहुँच गयी।
अमर उसको लेकर दिल्ली की एक सुनसान गली मे लेकर पहुँच गया वहा़ उसका दोस्त पहले से मौजूद था। अमर ने सुनयना से गहने व नकदी पहले ही अपने कब्जे में ले ली थी।
उसके दोस्त ने उसका सौदा पहले ही पच्चीस हजार में कर दिया था।
अब सुनयना अपनी करनी पर रो ही सकती थी । सुनयना अमर से रो रोकर यहाँ से लेजाने के लिए कह रही थी परन्तु वह तो उसकी सुन ही नही रहा था।
उधर सुनयना के घर वालौ की जब नींद खुली तब उनको मालूम हुआ कि सुनयना उनको धोका देकर भाग गयी है। जब उनको मालूम हुआ कि अमर भी यहाँ नही है।
अतः उन्हौने अमर के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखवादी। जब दूसरे दिन अमर आया । पुलिस तैयार बैठी थी । पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अमर जल्दी बापिस आने की भूल कर बैठा जिससे पकडा़ गया।
जब पुलिस ने उस पर दबाब बनाया तब उसने सब कुछ बता दिया क्योकि वह नया नया खिलाडी़ था। पुलिस उसे लेकर दिल्ली गयी। सबसे पहले उसके दोस्त को गिरफ्तार किया और उसके दोस्त की सहायता से सुनयना व कोठे की मालकिन और उसके साथ और भी लड़किया वहाँ से गिरफ्तार हुई।
इस तरह सुनयना के साथ कोई अनहौनी हौने से पहले ही वहाँ से निकाल लिया गया।
नरेश शर्मा
26/04/२०२२
दैनिक प्रतियोगिता कहानी के लिए लिखी गयी
Neha syed
27-Apr-2022 10:22 PM
Nice 👍
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Archita vndna
27-Apr-2022 11:20 AM
👍👍
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Punam verma
27-Apr-2022 10:14 AM
Very nice
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